14 कथन

आत्म-प्रेम कथन

इन्हें कैसे इस्तेमाल करें

आत्म-प्रेम के कथन ख़ुद से ऐसे बात करने का अभ्यास हैं जैसे किसी अपने से करते हैं। रोज़ कहे जाएँ तो ये कठोर भीतरी आवाज़ को धीरे-धीरे एक दयालु, सच्ची आवाज़ से बदल देते हैं।

जो दया मैं औरों को देता हूँ, वही ख़ुद को भी देता हूँ।

मैं प्रेम और आराम का हक़दार हूँ।

मैं ख़ुद को पूरी तरह अपनाता हूँ — ख़ामियों समेत।

मेरा मोल मेरी उत्पादकता से नहीं नापा जाता।

मैं जितनी दूर आ चुका हूँ, उस पर मुझे नाज़ है।

मैं ख़ुद को माफ़ करता हूँ और बढ़ने देता हूँ।

मैं ख़ुद से वैसे बात करता हूँ जैसे किसी दोस्त से करता।

मेरा भरसक ही काफ़ी है, कठिन दिनों में भी।

मैं अपने ही पक्ष में खड़ा हूँ।

मैं अपने अक्स से नरमी से मिलता हूँ।

मैं ख़ुद के लिए एक अच्छा साथ हूँ।

आज मैं अपने प्रति नरम पड़ता हूँ।

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