मैं दिन को वापस सौंप देता हूँ और सिर्फ़ आराम रख लेता हूँ।
20 कथन
नींद और विश्राम कथन
कल के कामों के लिए कल के पास काफ़ी समय होगा।
आज रात अँधेरा नर्म है — दीवार नहीं, कंबल जैसा।
एक-एक करके, मैं अपने विचारों के बदले साँसें ले लेता हूँ।
मैं रात को अपने भीतर उसका मौन काम करने देता हूँ।
जब मैं विश्राम करता हूँ, मेरी मरम्मत होती रहती है।
मैं इस दिन को दरवाज़े के पास रखे कोट-सा उतार देता हूँ।
आज रात कुछ भी सुधारने की ज़रूरत नहीं; बस विश्राम की।
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